एट्रोसिटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी तो युवक ने लगाई फांसी
विदिशा. एट्रोसिटी एक्ट में फंसाने की धमकी देने के कारण कोतवाली थाने के गजार मूंडरा गांव निवासी युवक के फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस मामले में परिजनों ने पुलिस में बयान भी दर्ज कराए हैं।
कोतवाली थाना प्रभारी आरएन शर्मा ने बताया कि राजेंद्रसिंह राजपूत उम्र 45 साल ने शुक्रवार को फांसी लगा ली थी। रविवार को सम्मेलन में शामिल होने आए सपाक्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विजय वाते समेत तमाम नेताओं ने रविवार को पीड़ित परिवार के लोगों को सांत्वना देने पहुंचे। उन्होंने पुलिस व प्रशासन से मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपये के मुआवजे व नौकरी देने की मांग की। फिलहाल कोतवाली थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पुरानी रंजिश में हुआ झगड़ा : जिला संरक्षक राकेश शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को दशहरा वाले दिन गजार मूंडरा गांव निवासी राजेंद्र सिंह राजपूत का उसी गांव के रहने वाले सुंदरलाल अहिरवार से पुरानी रंजिश को लेकर झगड़ा हुआ था। इसके चलते सुंदरलाल ने कथित तौर पर राजेंद्रसिंह को एट्रोसिटी एक्ट में फंसवा देने की धमकी दी थी। इसके बाद उसने टेलीफोन करके डायल 100 वाहन को गांव में बुलवाया। डायल 100 वाहन जब तक वहां पहुंची तब तक राजेंद्रसिंह ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
पुलिस ने मर्ग भी कायम किया था। इसके बाद राजेंद्रसिंह राजपूत के भाई फतेहसिंह राजपूत और बेटे रवि राजपूत ने थाने में बयान दर्ज कराया है कि राजेंद्रसिंह राजपूत को सुंदरलाल अहिरवार ने एट्रोसिटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी थी।
महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सर्गी खाती हैं। यह खाना आमतौर पर उनकी सास बनाती हैं। इसे खाने के बाद महिलाएं पूरे दिन भूखी-प्यासी रहती हैं। दिन में शिव, पार्वती और कार्तिक की पूजा की जाती है। शाम को देवी की पूजा होती है, जिसमें पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है। चंद्रमा दिखने पर महिलाएं छलनी से पति और चंद्रमा की छवि देखती हैं। पति इसके बाद पत्नी को पानी पिलाकर व्रत तुड़वाता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
इस बार पूजा का मुहूर्त शाम 5.40 से 6.47 तक है। अगर समय के लिहाज से देखें तो इसकी कुल अवधि 1 घंटे 7 मिनट है।
कब खोलें व्रत
अब बात चंद्रोदय यानी चांद के दिखने की। क्योंकि चांद को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। इस बार चंद्रोदय शाम 7.55 पर होगा।
कथा
एक समय की बात है, करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी किनारे बसे गांव में रहती थीं। एक दिन इनके पति नदी में स्नान करने गए। स्नान करते समय नदी में एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया गहरे पानी में ले जाने लगा। मृत्यु को करीब देखकर करवा माता के पति ने करवा को नाम लेकर पुकारना शुरू किया।
कोतवाली थाना प्रभारी आरएन शर्मा ने बताया कि राजेंद्रसिंह राजपूत उम्र 45 साल ने शुक्रवार को फांसी लगा ली थी। रविवार को सम्मेलन में शामिल होने आए सपाक्स के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विजय वाते समेत तमाम नेताओं ने रविवार को पीड़ित परिवार के लोगों को सांत्वना देने पहुंचे। उन्होंने पुलिस व प्रशासन से मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपये के मुआवजे व नौकरी देने की मांग की। फिलहाल कोतवाली थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है।
पुरानी रंजिश में हुआ झगड़ा : जिला संरक्षक राकेश शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को दशहरा वाले दिन गजार मूंडरा गांव निवासी राजेंद्र सिंह राजपूत का उसी गांव के रहने वाले सुंदरलाल अहिरवार से पुरानी रंजिश को लेकर झगड़ा हुआ था। इसके चलते सुंदरलाल ने कथित तौर पर राजेंद्रसिंह को एट्रोसिटी एक्ट में फंसवा देने की धमकी दी थी। इसके बाद उसने टेलीफोन करके डायल 100 वाहन को गांव में बुलवाया। डायल 100 वाहन जब तक वहां पहुंची तब तक राजेंद्रसिंह ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
पुलिस ने मर्ग भी कायम किया था। इसके बाद राजेंद्रसिंह राजपूत के भाई फतेहसिंह राजपूत और बेटे रवि राजपूत ने थाने में बयान दर्ज कराया है कि राजेंद्रसिंह राजपूत को सुंदरलाल अहिरवार ने एट्रोसिटी एक्ट में फंसाने की धमकी दी थी।
महिलाएं सुबह सूर्योदय से पहले उठकर सर्गी खाती हैं। यह खाना आमतौर पर उनकी सास बनाती हैं। इसे खाने के बाद महिलाएं पूरे दिन भूखी-प्यासी रहती हैं। दिन में शिव, पार्वती और कार्तिक की पूजा की जाती है। शाम को देवी की पूजा होती है, जिसमें पति की लंबी उम्र की कामना की जाती है। चंद्रमा दिखने पर महिलाएं छलनी से पति और चंद्रमा की छवि देखती हैं। पति इसके बाद पत्नी को पानी पिलाकर व्रत तुड़वाता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
इस बार पूजा का मुहूर्त शाम 5.40 से 6.47 तक है। अगर समय के लिहाज से देखें तो इसकी कुल अवधि 1 घंटे 7 मिनट है।
कब खोलें व्रत
अब बात चंद्रोदय यानी चांद के दिखने की। क्योंकि चांद को अर्घ्य देकर ही व्रत खोला जाता है। इस बार चंद्रोदय शाम 7.55 पर होगा।
कथा
एक समय की बात है, करवा नाम की एक पतिव्रता स्त्री अपने पति के साथ नदी किनारे बसे गांव में रहती थीं। एक दिन इनके पति नदी में स्नान करने गए। स्नान करते समय नदी में एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया गहरे पानी में ले जाने लगा। मृत्यु को करीब देखकर करवा माता के पति ने करवा को नाम लेकर पुकारना शुरू किया।
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